भारत

एमिटी छात्र हर्षित भट्ट की गड्ढे में डूबकर मौत, परिवार में शोक

Shantanu Roy
9 April 2026 2:00 PM IST
एमिटी छात्र हर्षित भट्ट की गड्ढे में डूबकर मौत, परिवार में शोक
x
जांच में जुटी पुलिस
Noida. नोएडा। एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। बुधवार शाम परीक्षा खत्म होने के बाद हर्षित अपने तीन दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था। इसी दौरान वह गड्ढे में उतर गया और गहराई में चला गया। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। 20 मिनट बाद पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे और हर्षित को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डीसीपी साद मियां खान ने बताया कि हर्षित भट्ट गाजियाबाद के इंदिरानगर का निवासी था। वह एमिटी यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) की पढ़ाई कर रहा था और छठा सेमेस्टर चल रहा था। उसके पिता ललित चंद्रभट भारतीय सेना में टेक्निकल विभाग में तैनात हैं और अभी लद्दाख में ड्यूटी पर हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन भी हैं।

यह घटना नोएडा में गड्ढों से संबंधित दूसरी गंभीर दुर्घटना है। इससे पहले 16 जनवरी की रात 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में गिर गए थे। इसके बाद नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन सीईओ को हटाया गया था। नए सीईओ ने सिविल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी गड्ढों से पानी निकालने, बैरिकेडिंग करने और नालों को कवर करने के आदेश दिए थे। डीसीपी ने बताया कि घटना के दिन चारों छात्रों का परीक्षा था। परीक्षा खत्म होने के बाद वे शराब लेकर एक खाली प्लॉट में गए और वहां शराब पीने के बाद नहाने के लिए गड्ढे में उतरे। पूछताछ में साथियों ने बताया कि वे पहले भी इसी गड्ढे में नहा चुके थे, लेकिन इस बार हर्षित ज्यादा अंदर चला गया और डूबने लगा। सूचना मिलने के करीब 20 मिनट के भीतर पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंच गए।

SDRF और NDRF की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। हर्षित को गड्ढे से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। फेफड़ों में पानी और रेत भरी मिली। हर्षित की मां ने कहा कि उनका बेटा तैरना जानता था, इसलिए गड्ढे में डूबना उनके लिए असंभव था। उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े आठ बजे हर्षित घर से निकला था। उसका 10 बजे पेपर था और उसने कहा था कि चार बजे तक घर आ जाऊंगा। लेकिन शाम को पता चला कि उनका बेटा अब नहीं रहा।
हादसा
जिस गड्ढे में हुआ, वह हैबिटेट सेंटर के निर्माण के लिए खोदा गया था। इस प्लॉट का हैंडओवर साल 2019–20 में हुआ था और निर्माण विवादों के कारण लंबित था। मामला 2022 से आर्बिट्रेशन में था। पूर्व CEO ने यूआरएनएन का करार रद्द कर दिया था और अब इसे पीपीपी मॉडल पर बनाने का प्रस्ताव पास किया गया है। लेकिन अदालत में मामला लंबित होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। बारिश और आसपास का पानी गड्ढे में भर गया, जिससे यह हादसे का कारण बन गया।
Next Story